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Showing posts from August, 2022

भाग्य नहीं दे रहा है साथ, बनते हुए काम अचानक बिगड़ जाए तो आप हो सकते है पितृ दोष से पीड़ित, जानें क्या होता है पितृ दोष, क्या है इसके लक्षण और उपाय।

पितृदोष आखिर क्यों होता है?, ऐसे सवाल हम सबके मन में आते है।  हिंदू धर्म में कर्मकाण्ड का बड़ा महत्व है। इन कर्म काण्डों को विधि-विधान से करने पर पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। लेकिन कई बार किसी कारण से पितृदोष के चलते मृत पूर्वज नाराज रहते है। पूर्व जन्म के पापों के कारण या पितरों के श्राप के कारण कुंडली में पितृदोष प्रकट होता है। इसके कारण पिता को मृत्युतुल्य कष्ट होता है, साथ ही व्यक्ति के भाग्योदय में बाधा आती है। ज्योतिष में जब भाग्य भाव पीड़ित हो जाता है तब ऐसा होता है। भाग्य भाव ही धर्म का घर दरअसल भाग्य भाव ही धर्म का घर कहलाता है, इसी घर से कुण्डली में पिता का भी विचार किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में यह घर क्रूर व पापी ग्रहों से पीड़ित हो जाए तो यह पूर्वजों की नाराजगी व अधूरी इच्छाओं की ओर इशारा करता है।इसके अतिरिक्त सूर्य और चंद्र यदि राहु या केतु से पीड़ित हो जाए तो भी पितृ दोष माना जाता है पीपल का घर में उगना  घर में पीपल का उगना शुभ संकेत नहीं है। किसी के घर में बार-बार पीपल का उगना पितृदोष की निशानी हो सकती है। ऐसा हो सकता है कि...

कब शुरू होंगे पितृपक्ष(श्राद्ध) 2022, पितृपक्ष में कैसे करें अपने पितरों को प्रसन्न, साल में 15 दिन ही क्यों होते हैं पितरों को समर्पित।

गणपति बप्पा की उपासना के बाद आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से अमावस्या तक 15 दिनों का पूरा पखवाड़ा पितृपक्ष के नाम से जाना जाता है। इस बार यह 11 सितंबर से लेकर 25 सितंबर तक रहेगा। यह पक्ष अपने पितरों को तृप्त करने का है। इस समय कोई भी लौकिक शुभ कार्य का प्रारंभ नहीं किया जाता है। इसके साथ ही किसी नए कार्य या नए अनुबंध को भी नहीं किया जाना चाहिए। यह समय है पितृ यानी इमीडिएट बॉस को प्रणाम करने का। क्यों किया जाता है तर्पण श्राद्ध ? माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान यमराज आत्मा को मुक्त कर देते हैं, जिसके चलते मृत आत्मा अपने परिजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें. इस दौरान तर्पण करने से पितृ दोष दूर होता है। बता दें कि पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से आने वाली समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। 15 दिन होते पितरों को समर्पित   यह पक्ष साल के 365 दिनों में से 15 दिन अपने पितरों को समर्पित रहता है, जिस तरह महादेव को एक पूरा माह समर्पित रहता है। मां शक्ति के लिए वर्ष में दो बार 9 दिन शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्र के रूप में रहते हैं, उसी तरह शास्त्रों में पित...

दिल्ली की राजनीति में कौन है सच्चा? कौन है झूठा?, जानें दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर लगे आरोपों की क्या है सच्चाई?

पिछले कुछ दिनों से राजनीति में जो कुछ देखने को मिल रहा है। उससे साफ जाहिर होता हैं कि अब राजनीति की परिभाषा बदल चुकी है। अब नेता अपने गिरेबान में झाँकना पसंद नहीं करते थे बल्कि किस नेता की कमीज कितनी गंदी है उस पर कितने दाग है। बस यह बताना जरूरी समझते है। खैर अब मुद्दें की बात दिल्ली की राजनीति में सियासतदानों की जुबानी जंग चल रहीं है। एक तरफ दिल्ली सरकार की फोज़ खड़ी है तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार की आर्मी कमान संभाले हुए है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। मनीष सिसोदिया के आवास समेत अन्य जगहों पर सीबीआई की छापामारी को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार बीजेपी पर हमलावर है। कौन किस पर क्या आरोप प्रत्यारोप लगा रहा है इस विषय पर बाद में बात करेंगे। लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि दिल्ली की राजनीति में यह घमासान क्यों हुआ? सवाल - दिल्ली के डिप्टी सीएम पर लगे आरोपों में कितनी सच्चाई है? सवाल - CBI की छापेमारी पर 'आप' क्यों बौखलाई हुई है? सवाल - अगर सिसोदिया बेकसूर है तो आप के नेता ज़हर क्यों उगल रहे है? सवाल - अगर बीजेपी के पास...

उत्तराखंड- रायपुर में बादल फटने और भारी बारिश ने देहरादून में मचाई तबाही, टपकेश्वर मंंदिर के पास बाढ़ जैसे हालात

उत्तराखंड़ से बादल फटने की खबर अक्सर सुनना को मिल जाती है  लेकिन शुक्रवार की देहरादून के लिए कहर बनकर आई। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के रायपुर में बादल फटने की सूचना मिली है। रायपुर (Sarkhet) प्रखंड के सरखेत गांव में स्थानीय लोगों ने सुबह 2 बजकर 45 मिनट पर बादल फटने की सूचना दी। जिसके बाद  SDRF की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। वहीं गांव में फंसे सभी लोगों को बचा लिया गया है। इसकी सूचना एसडीआरएफ के ओर से दी गई है।  बादल फटने के बाद कई जगहों पर चल भराव की सूचना मिली है। वहीं देहरादून के ही कई जगहों पर तेज बारिश हुई है। बताया जाता है कि देहरादून के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में दिखने लगा है। भारी बारिश के बाद कई नदियां ऊफान पर हैं। इससे बाढ़ की स्थिति भी बनी हुई है। कई जगहों पर सड़कें टूटने और घरों पानी घूसने की बात सामने आई है।  वहीं देहरादून में लगातार हुई भारी बारिश के बाद अब आम जनजीवन भी बाधित हुआ है। बताया जा रहा है कि इसको लेकर प्रशासन की ओर से पहले तैयारी नहीं की गई थी। जिसके कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ...

Ganesh Chathuthi 2022- आज मनाई जा रही है गणेश चतुर्थी, जानें कैसे करें गणपति बप्पा को प्रसन्न? गणपति बप्पा मोर्या

गणेश चतुर्थी पर कैसे करें गणपति बप्पा को प्रसन्न हिंदू धर्म में हर महीना का अपना अलग महत्व रखता है। हर महीना किसी न किसी देवता को समर्पित होता है। जैसे  सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस महीने भोलेनाथ की भक्ति  की जाती है।  देवों के देव महादेव के पुत्र गणेश की पूजा का पर्व आता है। वैसे तो किसी भी  देवी देवता की पूजा करने से पहले विघ्नहर्ता गणपति जी का नाम लिया जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी 31 अगस्त, बुधवार के दिन पड़ रही है। बुधवार के दिन होने की वजह से गणेश चतुर्थी का महत्व कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। बुधवार का दिन गणेश जी को समर्पित होता है और इसी दिन गणेश चतुर्थी होने से इस दिन व्रत का खास महत्व है। गणेश चतुर्थी के दिन घरों में गणपति की स्थापना की जाती है। और उन्हें 10 दिन तक घर में विराजमान किया जाता है। इस दिन से 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होती है। आइए जानते हैं भाद्रपद माह में पड़ने वाली गणेश चतुर्थी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में। 'शुभ मुहूर्त' और  ' तिथि' गणेश चतुर्थी की शुरुआत 31 अगस्त से हो रही है। 30 अगस्त, मंगलवार ...

Navratri 2022- शारदीय नवरात्रि में क्या है इस बार खास, जानें कब से शुरू हो रहीं है शारदीय नवरात्रि और घटस्थापना का शुभ मुहूर्त।

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।   दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। नवरात्र के दिन यानि माँ जगतजननी को प्रसन्न करने के दिन, शक्ति की आराधना करने का पर्व। नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि (shardiya navratri 2022 ) कहा जाता है। नवरात्रि के 9 दिन में शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा (Maa Durga) की पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल 2022 में शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर से शुरू होगी और 05 अक्टूबर तक चलेगी। साल में चार नवरात्रि होती है जिसमें से 2 गुप्त और अन्य 2 प्रत्यक्ष नवरात्रि कहलाती है। शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नवमी तिथि तक चलती है। दसवें दिन नवरात्रि पूजन का कलश और प्रतिमा विसर्जन किया जाता है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त  शारदीय नवरात्रि आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नवमी तिथि तक चलती है। पंचांग के अनुसार, इस बार अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि का प्रांरभ 26 सितंबर 2022 को सुबह 3 बजकर 24 मिनट से होग...

घर में छिपकली का होना क्या देता है संकेत, जानें अगर घर दिखें छिपकली तो क्या करें।

छिपकली को देखकर अच्छे अच्छों की हवा खराब हो जाती है। अगर छिपकली किसी शख्स के ऊपर गिर जाए तो मानो उस इंसान की सांस थम सी गई हो। फिलहाल देखा जाए तो घर में छिपकली का आगमन एक आम बात है। खासतौर पर यदि गर्मी और बरसात की बात की जाए, तो इस मौसम में घर में बहुत ज्यादा छिपकलियां देखने को मिलती हैं। अक्सर हम छिपकली के आने पर उसे भगाते हैं क्योंकि भले ही ये हमें नुकसान न पहुंचाएं लेकिन फिर भी ये हमारे खाने -पीने की सामग्रियों को दूषित कर सकती हैं। हम सभी छिपकली को कई तरह से घर से बाहर करने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि घर में छिपकली की मौजूदगी हमें भविष्य की किसी घटना का संकेत दे सकती है। क्या आप जानते हैं घर में इस जीव का दिखना शुभ माना जाता है या अशुभ? दरअसल, घर में छिपकली का दिखना धनलाभ के संकेत देता है। लेकिन अगर छिपकली घर के पूजा घर में दिखाई दे तो ही धनलाभ के संकेत देती है। छिपकली का दिखना सिर्फ धन लाभ के संकेत ही नहीं देता, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बनाए रखने का भी काम करता है। आइए जानते हैं छिपकली का कहां दिखना शुभ होता है और कहां अशुभ।  ...

मराठा समाज के लिए बड़ा झटका, महाराष्ट्र के पूर्व विधायक विनायक मेटे का सड़क हादसे में निधन, पुणे एक्सप्रेसवे पर हुआ हादसा।

महाराष्ट्र में मराठा समाज को बहुत झटका लगा है। मराठा समाज ने अपना एक नेता खो दिया है। महाराष्ट्र (Maharashtra) में मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे (Mumbai Pune Expressway) पर एक बड़ा सड़क हादसा हो गया है। इस हादसे में पूर्व विधायक विनायक मेटे (Vinayak Mete) की मौत हो गई है। उनकी एसयूवी कार के परखच्चे उड़ गए हैं।  बता दें कि विनायक मेटे शिव संग्राम पार्टी (Shiv Sangram Party) के नेता थे। उनकी उम्र अभी 52 साल थी। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर विनायक मेटे हादसे का शिकार हो गए हैं। वो महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रह चुके थे। विनायक मेटे मराठा लोगों को आरक्षण (Maratha Reservation) दिए जाने के बड़े समर्थक थे। पुलिस के मुताबिक, हादसा आज (रविवार को) सुबह करीब 5 बजकर 15 मिनट पर हुआ। गाड़ी में सवार थे 3 लोग पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये हादसा रसायनी थाना इलाके में मडप टनल (Madap Tunnel) के पास हुआ। विनायक मेटे अपने ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के साथ गाड़ी में सवार थे। ये तीनों पुणे से मुंबई जाने के रास्ते पर थे। वहीं मडप टनल के पास एक वाहन ने विनायक मेटे की कार को टक्कर मार दी, जिसकी ...

आजादी के जश्न में दिखा इंसानियत का धर्म, तिरंगे के रंग में रंगा पूरा हिंदुस्तान- हर घर तिरंगा।

गूंज रहा है दुनिया में भारत का नगाड़ा, चमक रहा आसमान में देश का सितारा। आजादी के दिन आओ मिलकर करें दुआ, बुलंदी पर लहराता रहे तिरंगा हमारा।। जी हां हर भारतीय का एक ही सपना है। हमारे देश का तिरंगा खुलें आसमान में लहराता रहे। क्योंकि यह हर भारतीय की आन बान शान है। भारत 15 अगस्त 2022 को ब्रिटिश शासन से अपनी आजादी के 75 साल के गौरवशाली साल का जश्न मनाएगा। भारत को 1947 में ब्रिटिश साम्राज्य के दमनकारी शासन से आजादी मिली थी। यह दिन हमारे बहादुर नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का प्रतीक है जिन्होंने अपने देशवासियों की खातिर अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। हमेशा की तरह, इस साल भी लाल किला आजादी के 75 साल के प्रतिष्ठित समारोहों का गवाह बनेगा। लेकिन एक सवाल हर किसी के दिल में हर साल आता है। वह यह कि भारत इस साल कौन-सा स्वतंत्रता दिवस मना रहा है? साल 2021 में संस्कृति मंत्रालय ने 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' की आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की थी, जिसके मुताबिक, 75वें स्वतंत्रता दिवस समारोह 12 मार्च, 2021 को शुरू हुआ। जो 75 हफ्तों के काउंटडाउन के बाद यानी एक साल 15 अगस्त, 2022 को...

आखिर गाय का हिंदू धर्म, संस्कृति में इतना महत्व क्यों है? गाय को मां का दर्जा क्यों दिया है? जानें गाय हमारे लिए पूजनीय क्यों है?

गाय माता में देवी देवताओं का वास होता है। गाय की पूजा-अर्चना करने से मोक्ष मिलता है। तभी तो कहते है- " गोमूत्रगोमयं सर्पि क्षीरं दधि च रोचना। षदंगमेतत् परमं मांगल्यं सर्वदा गवाम्।। " कहते है गोमूत्र,गोबर,दूध,घी,दहीं और गोरोचन यह अत्यंत पवित्र पदार्थ हैं। शास्त्रों के अनुसार गौसेवा एवं गौ पूजा के पुण्य का प्रभाव कई जन्मों तक बना रहता है !! हिंदू सनातन धर्म में गाय को संसार का सबसे पवित्र प्राणी कहा गया है। जब पृथ्वी पर जीवन उत्पन्न नहीं हुआ था उससे भी पहले से गाय इस ब्रह्मांड का प्रमुख हिस्सा रही है। हमारे धर्म ग्रंथों, वेदों, पुराणों में कामधेनु गाय का उल्लेख मिलता है, जो संसार की प्रत्येक वस्तु प्रदान करने की क्षमता रखती थी। गरुड़ पुराण में भी गाय का जिक्र मिलता है। उसमें कहा गया है कि मृत्यु के पश्चात आत्मा को वैतरणी नदी पार करने की आवश्यकता होती है और उसने यदि जीवित रहते हुए गौ दान किया है तो वह गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार कर जाता है। तो आइये जानते हैं हिन्दू धर्म में गौ पूजा का खास महत्व बताया जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति, गाय माता की सेवा और सब प...

गोपाष्टमी क्यों मनाई जाती है, जानें इस पर्व से जुड़ी क्या है मान्यताएं

कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गौ चारण लीला शुरू की थी। गाय को गौमाता भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन मां यशोदा ने भगवान कृष्ण को गौ चराने के लिए जंगल भेजा था। गोपाष्टमी पर गो, ग्वाल और कृष्ण को पूजने का महत्व है। कहते है  मुख्य रूप से यह गोपूजन से जुड़ा पर्व है। इस दिन गौ का पूजा अर्चना की जाती है। इस साल गोपाष्‍टमी 4 नवंबर को मनाई जा रही है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने इस दिन से ही गौओं को चराना आरंभ किया था। इससे पहले वे केवल गाय के बछड़ों को ही चराया करते थे। गोपाष्‍टमी के दिन गौ और उनके बछड़ों का श्रृंगार करके उनकी आरती उतारी जाती है। माना जाता है कि गौ के शरीर में अनेक देवताओं का वास होता है। इसलिए गौ की पूजा करने से उन देवताओं की भी पूजा स्वत: हो जाती है। गौ की परिक्रमा भी लाभ देती है। आइए जानते हैं इस त्‍योहार से जुड़ी मान्‍यताएं और इस दिन क्‍या-क्‍या करना चाहिए... श्री कृष्‍ण ने गोवर्धन पर्वत को थामा था गोपाष्टमी महोत्सव गोवर्धन पर्वत से जुड़ा उत्सव है। गोवर्धन पर्वत को ...

18 या 19 अगस्त किस दिन मनाई जाएगी जन्माष्टमी, क्या है जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त, तिथि और पूजन विधि।

सावन के बाद भाद्रपद का महीना आएगा। भाद्रपद में कई प्रमुख त्योहार आएंगे जिनमें से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भी एक है। हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यताएं हैं कि भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल भादो के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का बहुत अधिक महत्व होता है। भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है। मान्यता अनुसार इस दिन श्री कृष्ण के बाल रूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई लड्डू गोपाल की पूजा का विशेष महत्व है और इससे मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। जन्माष्टमी साल के बड़े त्योहारों में से एक है। जन्माष्टमी की पूजा मुख्य रूप से मथुरा, वृन्दावन और द्वारिका में विधि विधान से की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म इसी दिन हुआ था। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान श्री कृष्ण सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। आइए ज्योतिषाचार...

सावधान! घर में काली-लाल चींटियों का निकलना क्या है संकेत, जानें लाल-काली चींटियों का दिखना कितना शुभ-अशुभ।

कहते हैं कि धरती पर जितना भार सारी चींटियों का है उतना ही सारे मनुष्यों का है और जितने मनुष्य हैं उतने ही मुर्गे भी हैं। चींटियां मूल रूप से दो रंगों की होती है लाल और काली। अक्सर घरों में चींटियों का निकलना आम बात है। इसलिए अक्सर हम इसे सामान्य घटना जानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इन चींटियों से शुभ और अशुभ घटनाओ का भी पता चलता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, घर से चींटियों का निकलना ना केवल आपकी आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी देती हैं बल्कि होने वाले नुकसान के बारे में भी जानकारी देती हैं।अगर आपके घर में काली चीटियां (Black ants) आ रही हैं तो खुश हो जाइए, दरअसल माना जाता है कि ऐसा होने पर भविष्य में आपकी सुख-शांति में बढ़ोतरी होने वाली है। वहीं काली चींटियों को आपके ऐश्वर्य के बढ़ने से भी जोड़ा जाता है। काली चींटियों को खाना खिलाना शुभ होता है। अगर चावल के भरे बर्तन से चींटियां निकल रही हैं तो यह शुभ संकेत होते हैं। कुछ ही दिनों में आपकी धन वृद्धि होने वाली है। व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अच्छी होने जा रही है। काली चीटियां भौतिक सुख वाली चीजों क...

Raksha Bandhan 2022- रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है, इसका महत्व क्या है और इस बार रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त कब है।

बहन का प्यार किसी दुआ से कम नहीं होता है। फिर वो चाहे दूर भी हो तो गम कोई नहीं होता है। अक्सर रिश्ते दूरियों से फीके पड़ जाते है लेकिन बहन-भाई का प्यार कभी कम नहीं होता है। और इस प्यार को बढ़ाने और रिश्तों की डोर मजबूत करने राखी का त्यौहार आ रहा है। भाई बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन नजदीक है। इस दिन भाइयों की कलाई पर बहनें राखी बांधती हैं। हर साल रक्षाबंधन का त्योहार सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। लेकिन इस बार लोगों को रक्षाबंधन की तारीख और शुभ मुहूर्त को लेकर काफी कन्फ्यूजन है। क्योंकि इस बार दो दिन यानि की 11 अगस्त और 12 अगस्त को लेकर चर्चा है। ऐसे में चलिए आपका कंफ्यूजन दूर करते हैं और आपको इस त्योहार से जुड़ी सारी जानकारी देते हैं। जैसे कि रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है, इसका महत्व क्या है और इस बार रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त कब है। रक्षा बंधन कब मनाएं? इस साल रक्षाबंधन किस दिन मनाएं,इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राखी 11 अगस्त को बांधे या फिर 12 अगस्त को, राखी बांधने का कौन सा शुभ मुहूर्त रहेगा?  इस विषय में मोटे तौर पर कहा ज...