आखिर गाय का हिंदू धर्म, संस्कृति में इतना महत्व क्यों है? गाय को मां का दर्जा क्यों दिया है? जानें गाय हमारे लिए पूजनीय क्यों है?
गाय माता में देवी देवताओं का वास होता है। गाय की पूजा-अर्चना करने से मोक्ष मिलता है। तभी तो कहते है-
"गोमूत्रगोमयं सर्पि क्षीरं दधि च रोचना।
षदंगमेतत् परमं मांगल्यं सर्वदा गवाम्।।"
कहते है गोमूत्र,गोबर,दूध,घी,दहीं और गोरोचन यह अत्यंत पवित्र पदार्थ हैं। शास्त्रों के अनुसार गौसेवा एवं गौ पूजा के पुण्य का प्रभाव कई जन्मों तक बना रहता है !!
हिंदू सनातन धर्म में गाय को संसार का सबसे पवित्र प्राणी कहा गया है। जब पृथ्वी पर जीवन उत्पन्न नहीं हुआ था उससे भी पहले से गाय इस ब्रह्मांड का प्रमुख हिस्सा रही है। हमारे धर्म ग्रंथों, वेदों, पुराणों में कामधेनु गाय का उल्लेख मिलता है, जो संसार की प्रत्येक वस्तु प्रदान करने की क्षमता रखती थी। गरुड़ पुराण में भी गाय का जिक्र मिलता है। उसमें कहा गया है कि मृत्यु के पश्चात आत्मा को वैतरणी नदी पार करने की आवश्यकता होती है और उसने यदि जीवित रहते हुए गौ दान किया है तो वह गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार कर जाता है। तो आइये जानते हैं
हिन्दू धर्म में गौ पूजा का खास महत्व बताया जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति, गाय माता की सेवा और सब प्रकार से उनका अनुगमन करता है उस पर संतुष्ट होकर गाय माता उसे अत्यन्त दुर्लभ वर प्रदान करती हैं।
शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी वजह से तीर्थ पर नहीं जा पा रहा है तो वह गाय की सेवा करे। गाय की सेवा से तीर्थ करने के बराबर पुण्य मिलता है। गाय की सेवा करने वाले व्यक्ति के जीवन में सुख एवं समृद्धि बनी रहती है। अगर किसी की कुंडली में पितृदोष है या शुक्र नीच में राषि में है तो गाय की पूजा और उसकी देखभाल लाभकारी साबित हो सकता है। एक मान्यता यह भी है कि यदि कोई व्यक्ति गाय को भोजन कराकर किसी यात्रा पर जाए तो उसकी यात्रा सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, यात्रा से पहले यदि कोई गाय बछड़े को दूध पिलाती नजर आ जाए तो समझ लें कि उस व्यक्ति की यात्रा सफल हो गई।
यदि कोई व्यक्ति जन्म कुंडली में ग्रहों के बीच प्रभाव से परेशान हैं तो उसके लिए भी गाय की पूजा लाभकारी होगी। जन्म कुंडली में यदि शुक्र अपनी नीच राषि कन्या पर हो या शुक्र की दशा चल रही हो तो प्रातःकाल के भोजन में से एक रोटी सफेद रंग की देशी गाय को 1 महीने 15 दिन तक लगातार खिलाने से शुक्र का नीचत्व एवं शुक्र संबंधित कुदोष अपने आप ही खत्म हो जाता है। अगर कुंडली में पितृदोष है तो भी सफेद गाय को रोटी खिलाने से वह हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।
महाभारत के अनुशासन पर्व में कहा गया है:
दानानामपि सर्वेषां गवां दानं प्रशस्यते।
गावः श्रेष्ठाः पवित्रांश्च पावनं ह्योतदुत्तमम्।।
अर्थात्: संसार के सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ गाय का दान है।
गाय से जुड़ी खास बातें
गाय के दूध में रेडियो विकिरण रोकने की सर्वाधिक शक्ति होती है।
गाय का मस्तिष्क की कोशिकाओं को मजबूती प्रदान करता है, जिससे याददाश्त बढ़ती है।
गाय के दूध में केरोटीन होता है जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है।
गाय का दूध दिल की बीमारियों को दूर करता है।
गाय के एक तोला घी से यज्ञ करने से एक टन ऑक्सीजन बनती है।
गाय की पीठ पर प्रतिदिन 10-15 मिनट हाथ फेरने से ब्लड प्रेशर नॉर्मल हो जाता है।
क्षय रोगियों को गाय के बाड़े में या गौशाला में रखने से उसके गोबर की गंध से क्षय रोग और मलेरिया के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।
भारत में प्राचीन काल से ही बड़े-बड़े महापुरुषों द्वारा गौ सेवा और गोपालन होता चला आया है। रघुवंशी महाराज दिलीप नंदिनी गौ के लिए अपने प्राण देने हेतु प्रस्तुत हो गये। भगवान श्रीराम का अवतार ही गौ,ब्राह्मण हितार्थ हुआ था। भगवान श्री कृष्ण का बाल्य जीवन गौ सेवा में बीता,उन्होंने जंगलों में घूम-घूम कर गाय चराये। इसी से उनका नाम गोपाल पड़ा। गौ सेवा और गौ वंश की उन्नति भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं।
गौ सेवा ही सच्ची राष्ट्र सेवा एवं सर्वोत्तम भगवदाराधना है।
दोस्तों गौ माता संबंधी जानकारी आपको कैसी लगी है हमें कमेन्ट करके जरूर बताए।
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