मराठा समाज के लिए बड़ा झटका, महाराष्ट्र के पूर्व विधायक विनायक मेटे का सड़क हादसे में निधन, पुणे एक्सप्रेसवे पर हुआ हादसा।
महाराष्ट्र में मराठा समाज को बहुत झटका लगा है। मराठा समाज ने अपना एक नेता खो दिया है। महाराष्ट्र (Maharashtra) में मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे (Mumbai Pune Expressway) पर एक बड़ा सड़क हादसा हो गया है। इस हादसे में पूर्व विधायक विनायक मेटे (Vinayak Mete) की मौत हो गई है। उनकी एसयूवी कार के परखच्चे उड़ गए हैं।
बता दें कि विनायक मेटे शिव संग्राम पार्टी (Shiv Sangram Party) के नेता थे। उनकी उम्र अभी 52 साल थी। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर विनायक मेटे हादसे का शिकार हो गए हैं। वो महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रह चुके थे। विनायक मेटे मराठा लोगों को आरक्षण (Maratha Reservation) दिए जाने के बड़े समर्थक थे। पुलिस के मुताबिक, हादसा आज (रविवार को) सुबह करीब 5 बजकर 15 मिनट पर हुआ।
गाड़ी में सवार थे 3 लोग
पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये हादसा रसायनी थाना इलाके में मडप टनल (Madap Tunnel) के पास हुआ। विनायक मेटे अपने ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के साथ गाड़ी में सवार थे। ये तीनों पुणे से मुंबई जाने के रास्ते पर थे। वहीं मडप टनल के पास एक वाहन ने विनायक मेटे की कार को टक्कर मार दी, जिसकी वजह से कार में सवार तीनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद आननफानन में घायलों को नवी मुंबई के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां विनायक मेटे को मृत घोषित कर दिया गया।
मराठा समाज के लिए बड़ा झटका
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस भी अस्पताल के लिए निकल रहे हैं। विनायक मेटे का गोपीनाथ मुंडे के साथ काफी करीबी रिश्ता था।
उन्होंने 2014 विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के साथ हाथ मिलाया। इससे पहले वो एनसीपी समर्थक रहे थे। मेटे को मराठा समाज के लिए काम करने के लिए जाना जाता था, उनके निधन को इस समाज के लिए एक बड़ा झटका बताया जा रहा है।
विनायक मेटे की मौत पर नेताओं ने जताया दुख
मराठवाड़ा क्षेत्र के बीड जिले के रहने वाले पूर्व एमएलसी विनायक मेटे मराठा आरक्षण के समर्थक थे। वह एक बैठक में शामिल होने के लिए मुंबई जा रहे थे। महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि "विनायक मेटे का निधन चौंका देने वाला है। वह वास्तव में मराठा आरक्षण के मुद्दे को ठीक से उठा रहे थे। यह हमारे और मराठा समुदाय के लिए बहुत बड़ी क्षति है।" वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने भी मेटे के निधन पर दुख जताया है। पवार ने एक टीवी चैनल से कहा, ‘‘उनका ध्यान राजनीतिक मुद्दों की तुलना में सामाजिक मुद्दों पर अधिक था। वह एक नेता की तुलना में एक सामाजिक कार्यकर्ता अधिक थे।'' पवार ने कहा, ‘‘यह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका है। वह पहले भी राकांपा का हिस्सा थे। उन्होंने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठों के लिए आरक्षण की मांग को आगे बढ़ाया।’’ कांग्रेस नेता और मराठा आरक्षण पर महाराष्ट्र उप-समिति के पूर्व अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा, ‘‘मेटे जैसे नेता को खोना दुर्भाग्यपूर्ण है। अलग-अलग राजनीतिक दलों में होने के बावजूद, राज्य में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर मेटे और मेरा लगभग एक ही मत था।"
राज्यपाल ने व्यक्त किया शोक
शिव संग्राम संगठन के अध्यक्ष विनायक मेटे के निधन पर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल ने शोक संदेश में कहा, "एक सड़क दुर्घटना में शिव संग्राम संगठन के अध्यक्ष विनायक मेटे के निधन के बारे में जानकर स्तब्ध और दुखी हूं। पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए उनका समर्पित कार्य उल्लेखनीय था। मैं इस अवसर पर शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।" वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मौत कैसे हुई, पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं।
बता दें कि विनायक मेटे शिव संग्राम पार्टी (Shiv Sangram Party) के नेता थे। उनकी उम्र अभी 52 साल थी। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर विनायक मेटे हादसे का शिकार हो गए हैं। वो महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रह चुके थे। विनायक मेटे मराठा लोगों को आरक्षण (Maratha Reservation) दिए जाने के बड़े समर्थक थे। पुलिस के मुताबिक, हादसा आज (रविवार को) सुबह करीब 5 बजकर 15 मिनट पर हुआ।
गाड़ी में सवार थे 3 लोग
पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये हादसा रसायनी थाना इलाके में मडप टनल (Madap Tunnel) के पास हुआ। विनायक मेटे अपने ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के साथ गाड़ी में सवार थे। ये तीनों पुणे से मुंबई जाने के रास्ते पर थे। वहीं मडप टनल के पास एक वाहन ने विनायक मेटे की कार को टक्कर मार दी, जिसकी वजह से कार में सवार तीनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद आननफानन में घायलों को नवी मुंबई के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां विनायक मेटे को मृत घोषित कर दिया गया।
मराठा समाज के लिए बड़ा झटका
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस भी अस्पताल के लिए निकल रहे हैं। विनायक मेटे का गोपीनाथ मुंडे के साथ काफी करीबी रिश्ता था।
उन्होंने 2014 विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के साथ हाथ मिलाया। इससे पहले वो एनसीपी समर्थक रहे थे। मेटे को मराठा समाज के लिए काम करने के लिए जाना जाता था, उनके निधन को इस समाज के लिए एक बड़ा झटका बताया जा रहा है।
विनायक मेटे की मौत पर नेताओं ने जताया दुख
मराठवाड़ा क्षेत्र के बीड जिले के रहने वाले पूर्व एमएलसी विनायक मेटे मराठा आरक्षण के समर्थक थे। वह एक बैठक में शामिल होने के लिए मुंबई जा रहे थे। महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि "विनायक मेटे का निधन चौंका देने वाला है। वह वास्तव में मराठा आरक्षण के मुद्दे को ठीक से उठा रहे थे। यह हमारे और मराठा समुदाय के लिए बहुत बड़ी क्षति है।" वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने भी मेटे के निधन पर दुख जताया है। पवार ने एक टीवी चैनल से कहा, ‘‘उनका ध्यान राजनीतिक मुद्दों की तुलना में सामाजिक मुद्दों पर अधिक था। वह एक नेता की तुलना में एक सामाजिक कार्यकर्ता अधिक थे।'' पवार ने कहा, ‘‘यह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका है। वह पहले भी राकांपा का हिस्सा थे। उन्होंने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठों के लिए आरक्षण की मांग को आगे बढ़ाया।’’ कांग्रेस नेता और मराठा आरक्षण पर महाराष्ट्र उप-समिति के पूर्व अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा, ‘‘मेटे जैसे नेता को खोना दुर्भाग्यपूर्ण है। अलग-अलग राजनीतिक दलों में होने के बावजूद, राज्य में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर मेटे और मेरा लगभग एक ही मत था।"
राज्यपाल ने व्यक्त किया शोक
शिव संग्राम संगठन के अध्यक्ष विनायक मेटे के निधन पर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल ने शोक संदेश में कहा, "एक सड़क दुर्घटना में शिव संग्राम संगठन के अध्यक्ष विनायक मेटे के निधन के बारे में जानकर स्तब्ध और दुखी हूं। पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए उनका समर्पित कार्य उल्लेखनीय था। मैं इस अवसर पर शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।" वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मौत कैसे हुई, पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं।
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