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गौवंश पर लंपी वायरस का बरपा कहर, अब तक हजारों की संख्या गायों की हो गई मौत, जानें लंपी वायरस के क्या है लक्षण, कैसे करें लंपी वायरस से बचाव

कोरोना वायरस ने पूरे विश्व में हाहाकार मचा दिया था। जहां धीरे धीरे कोरोना जैसी घातक महामारी से पूरा देश लड़ता रहा। वहीं अब बेजुबान जानवरों पर लम्पी वायरस जैसी बीमारी का कहर टूट पड़ा है। 

आजकल देश में खासकर राजस्थान और गुजरात समेत 10 अलग अलग राज्यों में इस जानलेवा बीमारी का संक्रमण हो चूका है। हमारे देश के अतिरिक्त अन्य देशों में भी इस बीमारी (lampi virus) के चलते अभी तक बड़ी संख्या में दुधारू पशुओं की जान जा चुकी है। ये एक लाइलाज बीमारी है जिसका अभी तक कोई भी एंटीडोट नहीं तैयार किया जा सका है।


क्या है लंपी वायरस?
लम्पी वायरस (lampi virus) जानवरों में पायी जाने वाली एक जानलेवा बीमारी है। ये बीमारी दुधारू पशुओं में पाई जा रही है , मुख्य रूप से ये गायों में देखने को मिल रही है। इससे संक्रमित होने वाली गायों की हजारों की संख्या में मौत हो चुकी हैं। लंपी वायरस संक्रमित पशु के संपर्क में आने से ही अन्य स्वस्थ पशु को भी हो जाता है। लंपी वायरस को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने अधिसूचित बीमारी घोषित की है। इसका कोई पुख्ता इलाज अभी तक नहीं आया है। हालांकि इसका इलाज सिर्फ लक्षणों के आधार पर ही किया जा सकता है। इस बीमारी को ‘गांठदार त्वचा रोग वायरस’ यानी LSDV नाम से भी जाना जाता है। पहले भी अन्य देशों में इस माहामारी से जानवरों के संक्रमित होने के मामले देखे गए हैं। यह वायरस सिर्फ पशुओं में ही फैलता है और इसके इंसानों में संक्रमण होने का कोई खतरा नहीं है। इस बात की पुष्टि एम्स के डॉक्टरों ने कर दी है।

कैसे फैलता है लम्पी वायरस
लम्पी वायरस एक संक्रमित रोग है जो एक पशु से दुसरे पशु को हो जाता है। बता दें कि इसका संक्रमण मुख्य रूप से मच्छरों, मक्खियों, तत्तैयो, जूं आदि से फैल सकता है। इसके अलावा पशुओं के सीधे संपर्क में आने से भी फ़ैल सकती है। खासकर साथ खाने / दूषित खाने और पानी के सेवन करने से भी ये बीमारी फ़ैल सकती है। लंपी वायरस एक बहुत ही तेजी से फैलने वाला वायरस है। वर्तमान में 15 से भी अधिक राज्यों में इस बीमारी के फैलने की पुष्टि हो चुकी है। इस बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए समय पर लक्षणों की पहचान कर उनके आधार पर इलाज शुरू कर देना ही एकमात्र तरीका है।

लंपी वायरस के लक्षण
1-लम्पी वायरस से संक्रमित पशुओं को संक्रमण के बाद तेज बुखार बना रहता है।

2-दूध की मात्रा में अत्यधिक कमी आती है।

3-पशुओं की त्वचा पर चकत्ते और गांठे बन जाती हैं।

4-भूख कम लगना।

5-पशु के पैरों में सूजन और लंगड़ापन आना।

6-नर पशु में कार्य करने की क्षमता कम होना।

7-पशुओं के वजन में कमी आती है।

8-लार बहना और आँख नाक से पानी आना भी इसके मुख्य लक्षणों में से एक है।

9-इसके अतिरिक्त अलग अलग पशुओं में अलग अलग लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं।

लंपी वायरस से बचाव
1-यदि कोई पशु संक्रमित हो जाए तो उसे अन्य पशुओं से दूर/ अलग रखें।

2-पशुओं के स्थान को नियमित साफ़ सुथरा रखने का प्रयास करें।

3-मक्खी मच्छर आदि को खत्म करने के लिए समय समय पर स्प्रे या ऐसे ही किसी अन्य कोई घरेलु उपायों का प्रयोग करें।

4-यदि किसी संक्रमित पशु की मृत्यु हो जाये तो आप उसके शव को खुले में ना डालें बल्कि उसे गहरे में दफना दें। जिससे सक्रमण का खतरा न रहे।

5-समय समय पर आस पास के क्षेत्रों में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करें।

6-चिकित्सक के निर्देश पर आप अपने संक्रमित पशुओं को गोटपॉक्स वैक्सीन लगवा सकते हैं।

7-पशुओं को मल्टी विटामिन की दवाइयां भी दी जा सकती हैं (चिकित्सक के परामर्श के साथ) जिससे कि उनकी इम्युनिटी बढ़ सके।

8-लंपी वायरस से बचने के लिए एंटीबायोटिक्स, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीहिस्टामिनिक दवाएं भी दी जा रही हैं।

लंपी वायरस के यह वो लक्षण जिन्हें देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं आपका पशु लंपी वायरस से संक्रमित तो नहीं है साथ ही आप लंपी वायरस से बचाने के लिए आप यह महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं।

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