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पधारो म्हारे देश... राजस्थान की 10 सबसे खूबसूरत जगह, एक बार जरूर जाकर घूमे।

राजस्‍थान जितना अपने इतिहास के लिए जाना जाता है, उतना ही अपने किले, सुंदर महलों व भवनों के लिए भी जाना जाता है। आज हम आपको राजस्थान के 10 ऐसे खूबसूरत महल, किले व भवनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होने के साथ-साथ पर्यटन का मुख्य केंद्र भी हैं।

उदयपुर सिटी पैलेस (Udaipur City Palace)
उदयपुर सिटी पैलेस राजस्थान के सबसे मशहूर और खूबसूरत भवनों में से एक है। यह उदयपुर शहर में पिछोला झील के किनारे पर स्थित है। उदयपुर को झीलों के शहर के नाम से भी जाना जाता है। इस महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में राजा उदयसिंह द्वितीय द्वारा करवाया गया, जिसके बाद आने वाले राजाओं ने भी समय-समय पर इस पैलेस को खुबसूरत बनाने में अपना योगदान दिया। पैलेस के अंदर कई भव्य महल तथा एक भगवान जगदीश का मंदिर भी है। वर्तमान में इस पैलेस के एक भाग को सरकारी संग्रहालय बनाया गया है, जबकि पैलेस में स्थित फतह प्रकाश भवन तथा शिव निवास भवन को होटलों में तब्दील कर दिया गया है। पैलेस के एक अन्य हिस्से शम्भुक निवास में आज भी राजपरिवार निवास करते है।

2. चित्तौड़ किला (Chittor Fort)

चित्तौड़ किले का निर्माण मौर्य वंश के राजा चित्रांगद ने सातवीं शताब्दी में करवाया था। चित्तौड़गढ़ में स्थित यह किला भारत के विशालतम किलों में से एक है। पहले इस शहर को चित्रकूट के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसे चित्तौड़ कहा जाने लगा। इस किले पर मौर्य, गुहिलवंश, परमार, सोलंकी आदि अनेक वंशों ने शासन किया और 1174 ई. के आस पास पुनः गुहिलवांशियों, जिसे राजपूत कहते हैं, ने इसपर अधिकार कर लिया। यह किला आक्रमण और युद्ध के लिए बहुत ज्‍यादा ऐतिहासिक महत्‍व रखता है। इस किले पर तीन महत्वपूर्ण आक्रमण हुए और तीनों आक्रमणों में राज्य की रानियों द्वारा जौहर किया गया। जौहर एक प्रथा थी जिसके अनुसार किसी शत्रु द्वारा राज्य पर आक्रमण कर उस राज्य को जीत लेने की स्थिति में राज्य की सभी स्त्रियां आग में कूद जाती थी। इस किले को 2013 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान दिया गया है।

3. मेहरानगढ़ किला (Mehrangarh Fort)

जोधपुर में स्थित मेहरानगढ़ किला राजस्थान के प्राचीनतम्‍ किलों में से एक है। यह किला पहाड़ी के ऊपर 124 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसके निर्माण की नींव जोधपुर के 15वें शासक राव जोधा द्वारा मई 1459 में रखा गया और इसके बाद महाराज जसवंत सिंह ने 1638 से 78 के मध्य इस किले के निर्माण कार्य को पूरा करवाया। किले में 8 द्वार हैं तथा 10 किलोमीटर लंबी दीवार किले को घेरे हुए है। किले के अंदर कई भव्य महल स्थित हैं जिनमें मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना आदि शामिल हैं। राव जोधा की चामुंडा माता में अथाह श्रद्धा थी जिस कारण उन्होंने 1460 में किले के समीप चामुंडा माता के मंदिर का निर्माण करवाया।

4. सिटी पैलेस (City Palace)

सिटी पैलेस जयपुर का प्रमुख लैंडमार्क और सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में से एक है। सिटी पैलेस का निर्माण महाराजा सवाई जयसिंह ने 1729 से 1732 के मध्य कराया था। यह एक राजस्थानी व मुगल शैलियों की मिश्रित रचना है, जो पुराने शहर के बीचों बीच खड़ा है। इस खूबसूरत परिसर में कई इमारतें, विशाल आंगन और आकर्षक बाग हैं जो इसके राजसी इतिहास की निशानी है। इस पैलेस की खूबसूरती को देखने के लिए प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक देश-दुनिया से यहां आते हैं।

5. जैसलमेर किला (Jaisalmer Fort)

जैसलमेर किले का निर्माण 1178 में राजपूत शासक जैसल द्वारा कराया गया था, किन्तु कुछ समय पश्चात उनकी मृत्यु हो जाने के कारण दुर्ग के निर्माण का कार्य उनके उत्तराधिकारी शालिवाहन द्वारा पूर्ण कराया गया। जैसलमेर किला त्रिकुरा नामक पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है जिसकी ऊंचाई करीब 250 फ़ीट है। किले की खास बात है कि इसके निर्माण में गारे या चुने का प्रयोग नहीं किया गया है, केवल पत्थर पर पत्थर फंसाकर इसका निर्माण हुआ है। किले के अंदर कई भव्य महल हैं जिनमें सर्वोत्तम विलास, रंगमहल, मोतीमहल, ग़ज़ विलास आदि प्रमुख हैं।

6. आमेर का किला (Amer Fort)

यह किला जयपुर से 11 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ी के ऊपर स्थित है, यह 4 वर्ग किलोमीटर का एक भव्‍य शहर है। यह राजस्‍थान का प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। आमेर शहर मूल रूप से मीनाओं द्वारा बनाया गया था और बाद में इस पर राजा मान सिंह प्रथम का शासन था। आमेर किला अपने कलात्मक शैली तत्वों के लिए जाना जाता है। इसके विशाल प्राचीर और श्रृंखला के द्वार और कोबले मार्ग के साथ मावोता झील है, जो आमेर किले के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। इस किले के अंदर लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित आकर्षक और भव्य महल हैं।

7. उम्‍मेद भवन (Umaid Bhawan)

उम्मेद भवन राजस्थान के साथ भारत का भी शान है। जोधपुर में स्थित इस शानदार भवन का निर्माण राठौर राजवंश के शासक प्रताप ने 1920 में करवाया जो 1943 में बनकर तैयार हुआ। इस महल की योजना तैयार करने के लिए वास्तुकार हेनरी लोनचेस्टर को चुना गया ये एडविन लुटियंस के समकालीन थे, जिन्होंने दिल्ली में सरकारी भवनों के निर्माण में वास्तुकार का कार्य किया था। हेनरी लेनचेस्टर ने नई दिल्ली में निर्मित भवनों की तर्ज़ पर इस महल का निर्माण करवाया। इस महल के तीन हिस्से हैं जिसमे एक हिस्से में उम्‍मेद होटल है जो 1972 से ताज होटल के अधीन है और विश्‍व के सबसे अच्‍छे होटलों में गिना जाता है। वहीं दूसरा हिस्सा शाही परिवार के लिए तथा तीसरा हिस्सा एक संग्रहालय है।

8. हवा महल (Hawa Mahal)

जयपुर में जल महल के पास स्थित हवा महल एक शानदार महल है। इसका निर्माण 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था। यह महल लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से बनाया गया है। यह एक पांच मंजिला इमारत है जो आकार में किसी मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देता है। महल में 953 खूबसूरत जालीदार खिड़कियां हैं, इनको बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य था कि महल की स्त्रियां पर्दा प्रथा का पालन करते हुए महल के बाहर समारोह या दैनिक जीवनचर्या देख सकें। इसके अतिरिक्त इन छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियों से ठंडी हवा महल के भीतर आती रहती है जिससे महल वातानुकूलित बना रहता है।

9. जूनागढ़ किला (Junagadh Fort)

बीकानेर में जूनागढ़ किला, एक ऐसा किला है जिसका निर्माण राजस्थान के अन्‍य किलों की तरह पहाड़ी पर नहीं किया गया है। यह समतल जमीन पर बना है। इस किले का निर्माण राजा रायसिंह द्वारा 1589 से 1594 के मध्य कराया गया था। राजा रायसिंह ने 1571 से 1611 के मध्य बीकानेर पर शासन किया। किले के परिसर में खूबसूरत महल अनूप महल, बादल महल व मंदिर आदि बनाये गए हैं। वहीं महलों की दीवारें नक्काशीदार पत्थरों द्वारा बनाई गई हैं।

10. रणथंभौर किला (Ranthambore Fort)

सवाई माधोपुर में स्थित रणथंभौर किला का निर्माण राजा सज्‍जन वीर सिंह ने कराया था, यह दो पहाड़ियों के मध्य में स्थित है। राजा सज्‍जन के बाद उनके कई उत्तराधिकारियों ने इसके निर्माण में योगदान दिया। इस दुर्ग की सबसे अधिक ख्याति हम्मीर देव चौहान के शासनकाल 1282-1301 में रही। 1301 में इस किले पर अलाउद्दीन खिलजी ने कब्जा कर लिया इसके पश्चात 18वीं सदी के मध्य तक इस पर मुगलों का अधिकार रहा। बाद में जयपुर के राजा सवाई माधो सिंह ने इस दुर्ग को मुगलों से अपने पास सौपनें का अनुरोध किया। उन्होंने पास के गांव का विकास किया तथा किले को और मजबूत बनाया, बाद में उन्हीं के नाम पर इस शहर को सवाई माधोपुर नाम दिया गया। 21 जून 2013 से इस ऐतिहासिक स्थल को यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है।

राजस्थान की यह वो खूबसूरत जगह है जहां बार बार जाने का मन करता है अगर राजस्थान आने के बाद यहाँ नहीं घूमे तो आपका राजस्थान आना ही बेकार है। दोस्तों हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपकों कैसी लगी है हमें कमेन्ट करके जरूर बताए।

https://youtu.be/N62iVVl7Ml8

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