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भारत तो बदला लेकिन भारतीयों की सोच नहीं बदली, ऐसी गंदी सोच ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी नहीं छोड़ा।

देश का राष्ट्रपति और उसका सम्मान सर्वोपरि है और इस सम्मान  के साथ कभी समझोता नहीं किया जा सकता है। क्योंकि एक देश की आन बान शान सब राष्ट्रपति से है लेकिन जब जब राष्ट्रपति के अपमान की बात आती है तो हर भारतीय का खून खोलना लाजमी है बात ज्यादा दिनों की नहीं है।

21 जुलाई 2022 को भारत की पहली आदिवासी महिला को राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया। द्रौपदी मुर्मू ने 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ ली। देश को नया राष्ट्रपति मिलने पर पूरे देश जश्न देखने को मिला तो दूसरी तरफ विपक्ष के बयान सब हिलाकर रख दिया। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को एक निजी चैनल के कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ‘‘राष्ट्रपत्नी’’ कहकर संबोधित किया था। अधीर रंजन चौधरी के द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) को 'राष्ट्रपत्नी' बोलने पर गुरुवार को संसद (Parliament) में भारी हंगामा हुआ। भाजपा (BJP) ने कांग्रेस (Congress) नेता द्वारा राष्ट्रपति के प्रति इस शब्द के इस्तेमाल को लेकर विरोध जताया है।

संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और स्मृति इरानी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्र की पत्नी के रूप में संबोधित किया जाना भारत के हर मूल्य और संस्कार के विरुद्ध है। यह जानते हुए कि यह संबोधन संवैधानिक पद की गरिमा पर आघात करता है, तब भी कांग्रेस के एक पुरुष नेता ने यह घृणित कार्य किया है।’’ उन्होंने कांग्रेस को आदिवासी, गरीब और महिला विरोधी पार्टी बताया।

हालांकि अधीर रंजन चौधरी ने अपने बयान पर माफी मांगी है।अधीर रंजन चौधरी ने कहा "मैं जानता हूं कि भारत की राष्ट्रपति चाहे कोई भी हो वे हमारे लिए राष्ट्रपति ही हैं। ये शब्द बस एक बार निकला है। ये चूक हुई है। लेकिन सत्ताधारी पार्टी के कुछ लोग राई का पहाड़ बना रहे हैं"।अधीर रंजन चौधरी,कांग्रेस, दिल्ली

संसद में सत्ताधारी पार्टी के हंगामे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Congress President Sonia Gandhi) ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "अधीर रंजन चौधरी इस मामले में माफी मांग चुके हैं"।

दोनों पक्षों की दलीलें देखने के बाद कई सवाल उठते हैं। सवाल है क्या महिला देश की राष्ट्रपति कहलाने का हक नहीं रखती है। अगर रखती है तो फिर द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपत्नी क्यों कहा जा रहा है। देश के संवैधानिक पद का आपमान क्यो किया जा रहा है। सवाल ये भी है कि अगर यूपीए कार्यकाल में बनीं प्रतिभा पाटिल देश की राष्ट्रपति कहला सकती है तो फिर एनडीए कार्यकाल में बनीं द्रौपदी मुर्मू देश की राष्ट्रपति क्यों नहीं कहला सकती है। क्या द्रौपदी मुर्मू का आदिवासी होना गलत है क्या कांग्रेस एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति के रूप में पचा नहीं पा रहीं हैं।

दोस्तों देश की पहली अदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान पर आपकी क्या राय है। हमें कमेन्ट करके जरूर बताए। 

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