उड़ने दो मुझे, खुले आसमान में... पंख फैलाकर उड़ने दो मुझे, राह में अब रूकावट न बनो। मत रोको मुझे, अब मत रोको मुझे... जीना चाहती हूँ। आज़ाद हो कर, मुझे अब आज़ाद परिंदा रहने दो। उड़ने दो मुझे, खुले आसमान में।। कुछ लोगों को, मेरा आज़ाद होना... नगवार होगा।। तो कुछ.. मेरे पंखों को नोचना चाहेंगे। खैर, लोगों का क्या है? मुझें तो इस बेरहम दुनिया से, बहुत दूर निकलना है। खुले आसमान में उड़ना है।। उड़ने दो मुझे, खुले आसमान में ... हाँ, मैं जिद्दी... अपनी तकदीर को बदलना, जिद्दी कहलाता है। तो... मैं जिद्दी हूँ। खैर, अब मुझे जिद्दी ही रहना है। क्योंकि इसमें सुकून है, प्यार है और अपनापन है। अब मैं आज़ाद हूँ, आज़ाद परिंदा।। उड़ने दो मुझे, खुले आसमान में...
बेखौफ़ बेबाक़ क़लम की आवाज़